
maykhane-se-nahi-uski-aankhon-se-barbad-hue-the
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मेरा दोस्त भी अब वहीं जा रहा है, जिस मयख़ाने से हम बर्बाद हुए थे। अगर नशा शराब का होता, तो सुकून होता, कभी न कभी उतर ही जाता। आँखों के मयख़ाने से जो जाम पी ले, वह उम्र भर उस नशे का कर्ज़दार रहता है। वक़्त जितना बीतता जाता है, इश्क़ का ज़हर और गहरा होता जाता है। अब कैसे समझाऊँ दोस्तों को, मैं ख़ुद बर्बाद हुआ बैठा हूँ। वह प्यार नहीं करती, शिकार करती है। नशा चढ़ाकर प्यार में भी व्यापार करती है।
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