
mother-waiting-emotional-hindi-poem
┌──┐└──┘
दुनिया की सारी खुशियों को छोड़कर, मेरी गोद में आकर, खुश हो जाया करते थे। पल भर के लिए भी बिछड़ जाते, तो आँखों से सैलाब बहाया करते थे। स्कूल जाते समय मेरे आँचल से लिपटकर, तुम खूब रोया करते थे। कुछ पल की भी हमसे जुदाई, तुम बर्दाश्त नहीं कर पाते थे। तब मैं भी दिल पर पत्थर रखकर, तुम्हें खुद से दूर करती थी, तेरे आने की आहट, तेरे आने से पहले, सुनने की कोशिश करती थी। अब शायद तुम इसी का बदला ले रहे हो? मम्मी, मैं आऊँगा कहकर, कभी नहीं आते हो? कैसी ये ज़िम्मेदारी है कि, जुदाई भी हमसे सह रहे हो? बचपन में कहते थे, "मम्मी, तुमसे बिछड़कर मर जाऊँगा," तो अब हर रोज़ मर-मर कर जी रहे हो? बचपन में सारी खुशियों को छोड़कर, दौड़कर मेरे पास आते थे, अब उसी खुशी की तलाश में, मुझे छोड़कर चले जाते हो। तुम तो मेरे सीने से लगकर, गोद में छुपकर रोकर कह देते थे, तेरे बगैर मैं जी नहीं पाऊँगा। पर मेरी बेबसी देखो, मैं तो गले लगकर रो भी नहीं सकती, तेरे बगैर जी नहीं पाऊँगी, यह कह भी नहीं सकती। एक दिन ये आँखें तेरे इंतज़ार में थककर बंद हो जाएँगी, फिर हमारी सारी शिकायत दूर हो जाएगी। लगकर मेरे गले से तुम रोना चाहोगे, बचपन की तरह फिर उस दिन आँखों से तेरे सैलाब बाहर आ जाएँगे। by Raju Raj
— shayariprime.com



