maut-meri-mehbooba
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maut-meri-mehbooba

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मेरे ख्वाबों की परी थी, या फिर कहूं कोई स्वर्ग की अप्सरा, हाथों में फूल लिए, मुझे इज़हार कर रही थी। मैंने बोला हर कोई बेवफा है यहाँ, वो बोली मैं वफ़ा निभाऊँगी, जब अपने आलिंगन में सुलाऊँगी| फिर देखना, देखने हमारी जोड़ी को सब दूर-दूर से आएंगे, कोई मिठाई तो कोई फूल भी साथ में लाएंगे। नहला-धुला के सब हमें सजाएंगे, जब चलेगी हमारी बारात, दुश्मनों के भी आँसू छलक जाएंगे। बारी-बारी से सब हमें, कंधों पर आख़िरी सैर कराएंगे, फिर अग्नि माँ को साक्षी मानकर, उनकी गोद में, हम दोनो हमेशा के लिए, एक-दूसरे में खो जाएंगे।

— shayariprime.com

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