
janaze-par-aane-wali-bewafa-shayari
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तेरी माँग में सिंदूर न सजाने का, वादा मैंने पूरा किया, तुम भी वफ़ा निभा जाना, आकर मेरे जनाज़े को सजा जाना। रक़ीब के साथ जब, तुम डोली में मेरी गली से निकलोगी, सुनाई देगी तुझे अपने नाम की चीख़, दो पलटकर मत देखना। तुझे क्या लगा था, इंसान के मरने पर इश्क़ भी ख़त्म हो जाता है? सिर्फ़ शरीर मरते हैं, रूह यादों में भटकती रह जाती है। By Raju Raj
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