
heart-touching-bewafa-shayari-in-hindi-jo-mar-raha-hoon
┌──┐└──┘
जो मार रही है मुझे, उसी पे मर रहा हूँ, जो भूल गई मुझे, उसी को याद कर रहा हूँ। गुलफ़ाम जैसी गुल थी वो, काँटे ही हमें नसीब हुए, वो गुल-ए-गुलाब किसी और गमले में खिल गई, और हम उसके माली ही बने रहे। तेरी आँखों में बादल की तरह छाए थे हम, और तेरे प्यार की बारिश किसी और पर बरस गई, कीचड़ मेरे दामन पर लगे, और ख़्वाब किसी और के पूरे हुए। हमें यक़ीन था, कि मेरे घर चाँद आएगी साँझ देखाने, इंतज़ार में ज़िंदगी की शाम ढल गई, पर मेरे घर में दिए नहीं जले। चाँद आई मेरी क़ब्र पर, ज़िंदगी का दीप बुझने पर, जिसकी एक रोशनी को तरसा था ज़िंदगी भर, वो आकर मेरी क़ब्र को रोशन कर गई।
— shayariprime.com



