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दर्द भरी शायरी
58 beautiful sad shayari — sorted by popularity

💔 दर्द
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best-breakup-shayari-hindi
श्रद्धा को इतनी श्रद्धा से चाहा, फिर वह श्रद्धा से प्यार की श्रद्धांजलि देकर चली गई... फिर इतनी श्रद्धा से किसी और को, चाहने की श्रद्धा नहीं जागी। 🥀💭😞

💔 दर्द
1,000
kamoshi shayari hindi me
ज़रूरी नहीं कि हर सवाल का जवाब दिया जाए, कुछ सवालों का अधूरा छोड़ देना भी जवाब होता है। 🤐❓💭🍂✨

💔 दर्द
900
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जो मार रही है मुझे, उसी पे मर रहा हूँ, जो भूल गई मुझे, उसी को याद कर रहा हूँ। गुलफ़ाम जैसी गुल थी वो, काँटे ही हमें नसीब हुए, वो गुल-ए-गुलाब किसी और गमले में खिल गई, और हम उसके माली ही बने रहे। तेरी आँखों में बादल की तरह छाए थे हम, और तेरे प्यार की बारिश किसी और पर बरस गई, कीचड़ मेरे दामन पर लगे, और ख़्वाब किसी और के पूरे हुए। हमें यक़ीन था, कि मेरे घर चाँद आएगी साँझ देखाने, इंतज़ार में ज़िंदगी की शाम ढल गई, पर मेरे घर में दिए नहीं जले। चाँद आई मेरी क़ब्र पर, ज़िंदगी का दीप बुझने पर, जिसकी एक रोशनी को तरसा था ज़िंदगी भर, वो आकर मेरी क़ब्र को रोशन कर गई।

💔 दर्द
800
one-sided-love-shayari-in-hindi
तू ख़यालों में भी जब आती है, मैं खुशी से झूम उठता हूँ, कुछ पल भर का ही साथ तेरा, उसी में मैं जी लेता हूँ। हक़ीक़त हमें भी मालूम है, पर वो दर्द बहुत देता है, तन्हाई के इस सफ़र में, तेरी याद बहुत आती है। हम कैसे पुकारें तुझे, लबों पे तेरा नाम आता नहीं, दिल चुरा कर ले गई तू मेरा, तेरा नाम भी मुझको पता नहीं। कैसा हूँ मैं आशिक़ तेरा, कोई काम भी मुझको भाता नहीं, तेरी ही सूरत को देखूँ, इसके सिवा कुछ आता नहीं।

💔 दर्द
800
heart-touching-bewafa-shayari-in-hindi
मेरी आख़िरी साँस तक चाहत तू ही रहेगी, मैं मर भी जाऊँ तो क़बर खोद कर देखना, दिल में तू ही रहेगी। फ़रेबी थी तू, तेरी मोहब्बत भी फ़रेबी थी, लाल रंग से भी गहरा मेरी मोहब्बत सच्ची थी | चढ़ाकर प्यार की कश्ती में, बीच भँवर में छोड़ दिया, आँखों पे मोहब्बत की पट्टी बाँधकर मुझे मरने के लिए छोड़ दिया। ख़ता क्या थी मेरी कि ख़ुद से तूने दूर कर दिया, जिसको जान समझा उसी ने जान ले लिया। तड़प इतनी कि तुझे बता नहीं सकते, आँसू आँख में सूख गए जो देखा नहीं सकते | यक़ीन तुझे दिला न सका कितना याद करता हूँ, देखकर तेरी तस्वीर तुझसे ही बात करता हूँ। आँखों में तेरी तस्वीर लिए आँखें पत्थरा गईं, पर तू नहीं आई। मरघट पर मुझे ढूँढने मत आना, अपनों से बेवफ़ाई पाकर, वफ़ादारी सिखाने मत आना।

💔 दर्द
700
hijr-ka-dard-sachcha-pyar-hindi-poetry
हिज्र का दर्द भी तुम समझ जाओगी, शाम ढलते ही वापस तुम लौट आओगी। जवानी में दौलत की हवस लाज़िमी है, मगर, क्या बुढ़ापा भी तन्हाई में काट पाओगी? जब शब्द गले में ही अटकने लगेंगे, तब hamara एहसास का साथ ही साथ निभाएगा। तब तुम्हें समझ आएगा कि प्यार ही सबसे बड़ी दौलत है। जवानी का मंज़र हमेशा साथ नहीं रहता, पतझड़ आते ही परिंदे भी पेड़ों से उड़ जाते हैं। मगर जो सच्चा साथी हो, वह पतझड़ में भी साथ निभाता है। By Raju Raj

💔 दर्द
600
chemistry-lap-shayari
केमिस्ट्री लैब के precaution की तरह, तुमने भी पहले दिल तोड़ा, फिर बताया कि 💔 क्यों नहीं लगाना चाहिए।

💔 दर्द
500
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मेरी आख़िरी साँस तक चाहत तू ही रहेगी, मैं मर भी जाऊँ तो क़बर खोद कर देखना, दिल में तू ही रहेगी। फ़रेबी थी तू, तेरी मोहब्बत भी फ़रेबी थी, लाल रंग से भी गहरा मेरी मोहब्बत सच्ची थी | चढ़ाकर प्यार की कश्ती में, बीच भँवर में छोड़ दिया, आँखों पे मोहब्बत की पट्टी बाँधकर मुझे मरने के लिए छोड़ दिया। ख़ता क्या थी मेरी कि ख़ुद से तूने दूर कर दिया, जिसको जान समझा उसी ने जान ले लिया। तड़प इतनी कि तुझे बता नहीं सकते, आँसू आँख में सूख गए जो देखा नहीं सकते | यक़ीन तुझे दिला न सका कितना याद करता हूँ, देखकर तेरी तस्वीर तुझसे ही बात करता हूँ। आँखों में तेरी तस्वीर लिए आँखें पत्थरा गईं, पर तू नहीं आई। मरघट पर मुझे ढूँढने मत आना, अपनों से बेवफ़ाई पाकर, वफ़ादारी सिखाने मत आना।

💔 दर्द
400
hijr-ka-dard-sachcha-pyar-hindi-poetry
हिज्र का दर्द भी तुम समझ जाओगी, शाम ढलते ही वापस तुम लौट आओगी। जवानी में दौलत की हवस लाज़िमी है, मगर, क्या बुढ़ापा भी तन्हाई में काट पाओगी? जब शब्द गले में ही अटकने लगेंगे, तब hamara एहसास का साथ ही साथ निभाएगा। तब तुम्हें समझ आएगा कि प्यार ही सबसे बड़ी दौलत है। जवानी का मंज़र हमेशा साथ नहीं रहता, पतझड़ आते ही परिंदे भी पेड़ों से उड़ जाते हैं। मगर जो सच्चा साथी हो, वह पतझड़ में भी साथ निभाता है। By Raju Raj

💔 दर्द
400
maa-baap-ki-dard-bhari-kavita
बिना बात के बात बनाने लग गए, बिना काम के बहाने बनाकर पास बैठने लग गए। जो हमारी टूटी-फूटी, तोतली आवाज़ भी समझ लेते थे, आज उनकी लड़खड़ाती आवाज़ हम समझ नहीं पा रहे हैं। जो हमारे रूठने पर मनाते-मनाते नहीं थकते थे, बिना हमें खिलाए, खुद एक निवाला भी नहीं खाते थे। वही अब मना रहे है खुद को बीमार पड़ जाने को, रोटी न सही दवा ही मिल जाए बेटे के हाथ से खाने को। ऐसे तो सब कुछ भूल गए हैं वो, दिन-रात का फ़र्क भी मानो मिटा दिया है उन्होंने। पर कोई पूछ ले उनसे उनके बच्चों का नाम, उँगलियों पर गिन-गिनकर बता देते हैं वो। बचपन में जो स्कूल का बैग भी उठाने नहीं देते थे, वो आज कैसे इतना भारी बोझ कंधों पर रखकर चले गए। आज बहुत रोना चाहा, पर आँसू का एक कतरा भी नहीं निकला, शायद आँखें भी समझ गईं कि आँसू पोंछने वाला, और उन्हें मोती की कीमत समझने वाला, चले गए हैं वो। By Raju Raj