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दर्द भरी शायरी
54 beautiful sad shayari — sorted by popularity

💔 दर्द
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jis-jis-ko-chaha-usse-mehroom-ho-gaya-sad-shayari
जिस जिस को चाहा, उससे mahroom हो गया, मिसाल के तौर पे मौत को देख लो।

💔 दर्द
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talent-vs-sifarish-shayari-hindi
टैलेंट वाले तैरते रह जाते हैं, शिफारिश वाले शिखर पर पहुँच जाते हैं, महबूब माशूका से महरूम हो जाते हैं, नसीब वाले निकाह कर ले जाते हैं।🍀💍❤️🩹✨

💔 दर्द
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dil-ka-hacker-yaad-shayari
💻💔 काश डिवाइस के तरह, 🧠🥺 मैं दिल का भी हैकर होता, 🔄❤️🩹 उसकी याद से किसी और का याद बदल देता। 💔🥀 अब जिस्म से जान निकल सकती है, 😔🖤 पर दिल से उसकी याद नहीं। 🌙✨

💔 दर्द
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bindi-se-sindoor-ankahi-mohabbat-shayari
🌺✨पहले मिली तो बिंदी में थी, ❤️🔴 💫🌹 फिर मिली तो सिंदूर में थी, ❤️🔥🧡 🥺💔 कैसे करते इज़हार-ए-मोहब्बत, 🌙🤍 🥀😔 अब वो किसी और की अमानत थी। 💍❤️🩹

💔 दर्द
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khudari-aur-mannat-dard-bhari-shayari
तेरा हमदर्द न होने का दर्द तो रहेगा, इसके बाद अब हर दर्द बेअसर ही रहेगा। मन ने चाहा, मन्नत में मांग लूँ तुझे, पर ख़ुदारी मेरी, ख़ुदा से तुझे मांगने भी नहीं दिया ।🍂😞

💔 दर्द
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ankahi-mohabbat-usi-ke-naam-se-mashhoor-ho-gaya
मेहबूब मैं तुमसे महरूम हो गया, ख्वाहिश थी तुम्हें खुश देखने की, इसीलिए तुमसे दूर हो गया। कर न सका इज़हार-ए-मोहब्बत, इसलिए तेरी नज़र में मैं मकरूर हो गया। मालूम था तुम्हें भी मेरे दिल की हालत। पर जब तुमने पूछा, मैं खामोश रह गया। शब्दों से कहता तो वो प्यार नहीं होता, जज़्बात को जो तुम न समझी, उसे अल्फाज़ से मैं क्या समझाता, इसीलिए मैंने भी कह दिया, तुमसे कभी प्यार नहीं किया। फिर हम साथ में मुस्कुराए थे, अपने जज़्बात को हम इस तरह छिपाए थे, बता नहीं कैसी हंसी थी मेरी, जिससे आंखों में मोती सज रहे थे, जब एक मोती हमसे बिछड़ रही थी। कितनी मुश्किल थी दोनों मोतियों को संभालना, एक जो आंख से निकल रही थी, और एक जो दिल से। चाहकर भी उसे आवाज़ दे न सका। पलटकर चाहा देखना, पर देख न सका। पलभर में वो हमसे दूर हो गई, या फिर वो मेरे दिल के और करीब हो गई। अब उसकी यादों ने घर बसा लिया मेरे दिल में, अब उसकी यादों का दर्द ही मेरा सुकून हो गया। जिसे पा न सका, उसी के नाम से मशहूर हो गया।

💔 दर्द
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phoolon-ki-arzoo-maut-shayari
काश मौत और पहले मिली होती, जिसके हाथों से एक फूल की आरज़ू थी ज़िंदगी भर, मरते ही, वो फूलों की माला चढ़ा गई। ☽︎♡☾︎

💔 दर्द
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dil-lagaya-dhoka-mohabbat-shayari
उसने दिल लगाने के लिए दिल लगाया था मुझसे, मैं उसे मोहब्बत समझ कर दिल लगा बैठा उससे।

💔 दर्द
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humsafar-nahi-bani-shayari
वो भी जी रही है, मैं भी जी रहा हूँ, अगर हम बन के जीते तो ज़िंदगी जी लेते।

💔 दर्द
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दुनिया की सारी खुशियों को छोड़कर, मेरी गोद में आकर, खुश हो जाया करते थे। पल भर के लिए भी बिछड़ जाते, तो आँखों से सैलाब बहाया करते थे। स्कूल जाते समय मेरे आँचल से लिपटकर, तुम खूब रोया करते थे। कुछ पल की भी हमसे जुदाई, तुम बर्दाश्त नहीं कर पाते थे। तब मैं भी दिल पर पत्थर रखकर, तुम्हें खुद से दूर करती थी, तेरे आने की आहट, तेरे आने से पहले, सुनने की कोशिश करती थी। अब शायद तुम इसी का बदला ले रहे हो? मम्मी, मैं आऊँगा कहकर, कभी नहीं आते हो? कैसी ये ज़िम्मेदारी है कि, जुदाई भी हमसे सह रहे हो? बचपन में कहते थे, "मम्मी, तुमसे बिछड़कर मर जाऊँगा," तो अब हर रोज़ मर-मर कर जी रहे हो? बचपन में सारी खुशियों को छोड़कर, दौड़कर मेरे पास आते थे, अब उसी खुशी की तलाश में, मुझे छोड़कर चले जाते हो। तुम तो मेरे सीने से लगकर, गोद में छुपकर रोकर कह देते थे, तेरे बगैर मैं जी नहीं पाऊँगा। पर मेरी बेबसी देखो, मैं तो गले लगकर रो भी नहीं सकती, तेरे बगैर जी नहीं पाऊँगी, यह कह भी नहीं सकती। एक दिन ये आँखें तेरे इंतज़ार में थककर बंद हो जाएँगी, फिर हमारी सारी शिकायत दूर हो जाएगी। लगकर मेरे गले से तुम रोना चाहोगे, बचपन की तरह फिर उस दिन आँखों से तेरे सैलाब बाहर आ जाएँगे। by Raju Raj

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ख़्वाहिश से पहले आपको हर ख़ुशी मिले, हमको ख़ुशियों की ख़ुदकुशी मिली। ये अपना-अपना मुक़द्दर था, कोई बिछड़कर निखर गया तो कोई बिखर गया। वफ़ा-ए-मोहब्बत हम निभाते रह गए, बेवफ़ा अपने हुनर का रंग दिखा गए। हम एक की ही दिल्लगी से उबर नहीं पाए, वो सैकड़ों फूल मसलकर हाथों से ख़ुशबू फैला गए। हम सच्ची मोहब्बत करके भी पलाश का फूल बन गए, रंग तो बेशुमार थे हममें, मगर ख़ुशबू न बिखेर पाए।

💔 दर्द
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अर्ज़ी दे रहा हूँ, मैं अपने दिल की रिहाई का, सुनवाई कर दो, अपने वफ़ादार मुलाज़िम का, कीमत तो बताओ तो तुम रिहाई का। दिल गिरवी रखा है, ज़िंदगी भी रख देंगे, तेरे लिए तो मौत से भी सौदा कर लेंगे। तेरे एक मुस्कान देखने के ख़ातिर, फिर से गुनाह कर लेंगे, दिल क़ैद में है तुम्हारे, साँस भी गिरवी रख देंगे। एक बार जो तुम पुकारोगी, हम क़ब्र से भी लौट आएंगे।