
arzi-de-raha-hoon-dil-ki-rihaai-ka-kavita-hindi
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अर्ज़ी दे रहा हूँ, मैं अपने दिल की रिहाई का, सुनवाई कर दो, अपने वफ़ादार मुलाज़िम का, कीमत तो बताओ तो तुम रिहाई का। दिल गिरवी रखा है, ज़िंदगी भी रख देंगे, तेरे लिए तो मौत से भी सौदा कर लेंगे। तेरे एक मुस्कान देखने के ख़ातिर, फिर से गुनाह कर लेंगे, दिल क़ैद में है तुम्हारे, साँस भी गिरवी रख देंगे। एक बार जो तुम पुकारोगी, हम क़ब्र से भी लौट आएंगे।
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