
dahej-pratha-nari-shakti-kavita
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जब घर में किसी लड़की का जन्म होता, पिता उसे लक्ष्मी कहकर लक्ष्मी बाटते, माँ को उसी पल कुछ ख्याल आता, लक्ष्मी के लिए लक्ष्मी बचाने का याद आता। जहाँ पिता को, बेटी के हाथ में कलम थमाने से पहले, तिलक क्या देंगे, उसकी चिंता थाम लेती है, यह कैसा रिवाज है, जिसमें इंसान ही इंसानियत को मार देती है। जहाँ लड़की की शादी लड़का से मिलकर नहीं, लक्ष्मी क्या मिलेगा, इस पर तय किया जाता है, घर की दहलीज़ में, लक्ष्मी का स्वागत, लक्ष्मी का स्वागत करने के बाद ही की जाती है। हम कैसे समाज में जी रहे हैं, जहाँ पढ़े-लिखे युवक दहेज की मांग कर रहे हैं, और उससे भी बुरी बात ये है, पढ़ी-लिखी लड़की अपने स्वाभिमान को मारकर, इसे स्वीकार कर रही हैं। उठाओ बहनों अपने कलम रूपी हथियार को, और कलम की धार से तिलक जैसी कुप्रथाओं को, काटकर खत्म कर दो, और समाज में अपनी नई पहचान बना लो।🌱🌍
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